क्या है भिनसार?

आम तौर पर शाम होने पर रात होती है और रात ढलने पर भिनसार(सवेरा), लेकिन एगो अइसन जगह के कल्पना कीजिये जहाँ शाम अँधेरा लाती है तो सुबह अंधेरे से भी करिया अउरी घोर निराशा को।  जी हाँ! सही पढ़ रहे हैं आप, बिहार उ स्टेट है जहाँ आप आसानी से शाम और सुबह का अंतर लबरिया सकते हैं।

ई निराशावादी अँधेरा से बिहार कबो डरा नहीं है, लेकिन कबो लड़ा भी नहीं है। बिहारी लोग इसका आदत डाल लिया है। हालात कुछ ऐसे हो चले हैं कि हम सब कुछो आँख से देखते हैं फिर ये प्रिटेंड कर लेते हैं कि हमारी आँखे भी निराशावाद के उस करिया स्याह अँधेरे में कहीं खो गयी है और हम कुछ देखे ही नहीं।

सुबह तो यहाँ भी होती है लेकिन वैसी नहीं होती जैसे की बाकी दुनिया की।

इतिहास गवाह रहा है जेतना हमने दुनिया को दिया है, लेकिन रिटर्न में हमें देश और दुनिया से ओतना ही भारी मात्रा में निराशा ही मिली हैं।  खैर, शिकायत नहीं करेंगे आज। अब हम उस स्याह रात को भोर की ओर धकेलेंगे, और उस पुरानका सुबह को नयका भिनसार बनायेंगे।  हम उ सड़क और पुल बनेंगे जो आपके और बिहार बीच की खाई को मिटा सके।

हम दुनिया को जोड़ेंगे आपसे और आपको जोड़ेंगे बिहार से, तो सुबह आपका रहा और भिनसार’  हम सब का।

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क्या करते हैं?

नजर रखते हैं गांव, शहर, समाज, देश और दुनियाँ पर।

खेलते हैं नेता-नेता और ओका-बोका।

कहते हैंभूली-बिसरी और इतिहास के पन्नों में कहीं धूल फांकती कहानियां।

पढ़ते-पढ़ाते हैं – नई-पुरानी किताबें और वो चिट्ठियाँ जो आपके पत्ते तक ना पहुंच पायीं।

मिलवाते  हैं  – उन तमाम लोगों से जिनसे आप शायद कभी मिल ना पाए।

देखते-सुनाते हैं – सिनेमा और संगीत।

अपडेट रखते हैं – आपको ताजा-तरीन खबरों से।

*नोट: बातें हम फैक्ट और डाटा के आधार पर लिखते हैं । लोकेशन हमारा इन्टरनेट है । मून और मार्स पर हमारी कोई दूसरी शाखा नहीं है ।